अर्थ:
पूरा ब्रह्मांड उसी राम की अभिव्यक्ति है।
वेदांत के अनुसार:
यह अद्वैत का विराट स्वरूप है। जो पर्वत है, नदी है, तारे हैं, शरीर है, समय है — सब उसी एक चेतना का विस्तार हैं। जैसे समुद्र से लहरें उठती हैं, वैसे ही ब्रह्म से यह संसार प्रकट होता है।
गूढ़ अर्थ:
जब मन अलगाव में जीता है, तब संसार संघर्ष लगता है।
जब सत्य में देखते हो, तब सब एक ही ऊर्जा, एक ही अस्तित्व की अभिव्यक्ति दिखते हैं


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